शरीरों का कलात्मक विद्रोह

डॉ. सुनील दीपक, 29 फरवरी 2020

करीब 12 या 13 वर्ष पहले मैंने अपने पुराने ब्लाग पर अमरीकी फोटोग्राफर कलाकार स्पेँसर टूनिक के बारे में एक आलेख लिखा था, जिसके बारे में उस समय हिन्दी चिट्ठाजगत में थोड़ी सी चर्चा हुई थी। टूनिक अपनी नारी व पुरुष नग्न शरीरों की कलात्मक तस्वीरों के लिए विश्व प्रसिद्ध हैं। हालाँकि उन्होंने अपनी इस कला शैली की शुरुआत इक्का दुक्का व्यक्तियों की तस्वीरों की थी, पिछले बीस वर्षों में उन्हें तीस चालिस से ले कर कई हज़ार व्यक्तियों के नग्न शरीरों को एक खुली जगह पर एकत्रित करके उनकी तस्वीरें खींचने के लिए प्रसिद्धी मिली है। इन दिनों में उनके चित्रों की एक प्रदर्शनी, आस्ट्रिया की राजधानी वियेना के एक संग्रहालय में चल रही थी, उसके बारे में पढ़ा तो उनके बारे में दोबारा से लिखने की सोची।

स्पैंसर टूनिक की मानव शरीरों से चित्रित कला

ग्रीस, रोमन साम्रज्य, मिस्र और भारत की पुरातन कला में मानव शरीर को नग्न या थोड़ा सा ढक कर दिखाने की परम्पराएँ थी। लेकिन पिछली कुछ सदियों में विश्व अधिक "सभ्य" हो गया था और विषेशकर परम्परागत समुदायों में नग्नता को असभ्य माना जाने जाने लगा था. मध्यपूर्व के विभिन्न देशों में, विषेशकर रूढ़िवादी इस्लाम में, नारी शरीर का थोड़ा सा भी दिखना, असभ्य समझा जाता था और आज भी कई देशों में, पढ़ेलिखे परिवारों में भी, अक्सर बदन के साथ साथ, सिर को ढकना सभ्यता की निशानी माना जाता है। बहुत से देशों में खुले जनस्थलों पर निर्वस्त्र होने पर आप को पुलिस पकड़ कर जेल में डाल देती है। ऐसे में वह कला जिसमें मानव शरीरों का नग्न रूप हो, उसे सामाजिक विद्रोह ही माना जायेगा।

इस आलेख में स्पैँसर टूनिक की इस अनोखी कला यात्रा के बारे में कुछ जानकारी है। इस आलेख के साथ की सभी तस्वीरें उनकी ही हैं और इसकी कुछ जानकारी उनके बारे में लिखे आलेखों तथा उनके साक्षात्कारों से ली गयी है, विषेशकर नाउसिका एल मक्की (Nausikaa El-Mecky) के एक आलेख से।

कला की शुरुआत

टूनिक फोटोग्राफर थे, अन्य फोटोग्राफरों की तरह वह भी नग्न शरीरों की कलात्मक तस्वीरें अपने न्यू योर्क के स्टूडियो में खींचते थे। फ़िर 1990 में उनके मन में आया कि इन शरीरों को बाहर खुले में गुज़रते जीवन की पृष्ठभूमि में रख कर तस्वीरें खींचें। शुरु में कुछ वर्षों तक वह यह तस्वीरें सुबह सुबह खींचते थे, जब सड़कों पर लोग कम होते थे। जल्दी जल्दी तस्वीरें खींचते और फ़िर इससे पहले कि किसी को पता चले या कोई कुछ कहे, फोटोग्राफर और नग्न मॉडल भाग कर कार में वापस लौट आते।

स्पैंसर टूनिक की मानव शरीरों से चित्रित कला

फ़िर धीरे धीरे, वह एक दो लोगों के बजाय छोटे छोटे गुटों की तस्वीरें लेते, और आत्मविश्वास बढ़ा तो दिन में जानी मानी जगहों पर भी अपनी उसी नग्न शैली की तस्वीरें खींचने लगे। जैसे कि जब मध्य अफ्रीकी देश रुवान्डा में नर सँहार हुआ तो उन्होंने न्यू योर्क में संयुक्त राष्ट्र संघ के बाहर 25 नग्न लोगों को ज़मीन पर लिटाया जैसे कि आंतकवादी हमले में मरे हों और उनकी तस्वीर खींचीं। इसके बारे में उन्होंने कहा कि वह एक्टिविस्ट नहीं हैं, समाज को नहीं बदलना चाहते, बल्कि कला के माध्यम से अपनी भावनाओं को व्यक्त करना चाहते थे।

अपनी कला यात्रा के इन प्रारम्भिक वर्षों को वह अपने आप को दुनिया से छुपा रहने का समय कहते हैं, तब उन्हें कोई नहीं जानता था। यह इंटरनेट से पहले का समय था, जब वह न्यूयोर्क के बार, कैफे और रेस्त्राँ में अजनबी लोगों को अपनी कला के बारे में बताते थे और उनसे पूछते थे कि क्या वह उनकी तस्वीरों के लिए निर्वस्त्र पोज़ करेंगे? बाकी समय में वह कुछ अन्य काम करते थे और यह तस्वीरें शनिवार या रविवार को खींचते थे।

स्पैंसर टूनिक की मानव शरीरों से चित्रित कला

कला के लिए जेल यात्राएँ

पिछले दो दशकों में टूनिक को मोस्को से ले कर मेक्सिको सिटी तक, दुनिया के विभिन्न देशों ने आमन्त्रित किया है कि वह वहाँ जा कर नग्न मानव शरीरों को इक्ट्ठा करके उनसे अपनी जीती जागती अमूर्त कला को बनायें। लेकिन हमेशा ऐसा नहीं था। उनके अपने शहर न्यू योर्क ने उनकी कला को बेहूदा तथा शर्मनाक माना। उनकी परेशानियाँ शुरु हुईं 1994 में जब रिप्बलिकन पार्टी के रूडी जूलियानी न्यूयोर्क के मेयर बने। जूलियानी ने चुनावों में वादा किया था कि वह न्यू योर्क से अपराधों को मिटा देंगे। इस वादे को निभाने के लिए उन्होंने आदेश दिये कि शहर में जहाँ कोई अराजकता दिखायी दे, जैसे कि दीवारों पर ग्राफिटी बनाने वाले या अफीमची नशेड़ी नशा बेचें, तो उनको तुरंत जेल में डाल दिया जाये। इस अराजकता की परिभाषा में टूनिक की नग्न शरीरों की कला को भी गिना गया। उसके बाद 5 वर्षों तक टूनिक बार बार गिरफ्तार हुए।

जब गिरफ्तार होते, हर बार उनकी पैरवी करने मानव अधिकारों के लिए लड़ने वाले वकील कूबी उनका साथ देने आते और हर बार अदालत ने उन्हें बरी कर दिया। यही नहीं, अंत में उच्च न्यालय ने कहा कि न्यूयोर्क पुलिस को टूनिक को अपनी कला अभिव्यक्ति से नहीं रोकना चाहिये, लेकिन पुलिस नहीं रुकी। 1999 में जब टूनिक को फ़िर से गिरफ्तार किया गया तो उनका हौंसला टूट गया। पुलिस ने उन्हें कार में धकेला और तीस अपराधियों के साथ लॉकअप में बन्द कर दिया, जहाँ सबके लिए केवल एक ही पाखाना था। टूनिक 2000 में यह मुकदमा जीते तो उन्होंने सोच लिया कि वह न्यूयोर्क में दोबारा इस तरह से पुलिस से डरते हुए अपनी कला नहीं बनायेंगे।

यह समाचार कनेडा में मोंट्रियाल शहर के मेयर ने पढ़ा तो उन्होंने टूनिक को आमंत्रित किया कि वह अपनी अगली कलाकृति को उनके शहर में बनायें। तब से जो सिलसिला प्रारम्भ हुआ, वह आज तक नहीं टूटा। हर वर्ष दुनिया के विभिन्न देश उन्हें आमन्त्रित करते हैं और उनकी कलाकृतियों में भाग लेने के लिए इतने लोग इच्छुक होते हैं कि वह सबको नहीं स्वीकार कर पाते।

टूनिक की कला अभिव्यक्ति

पहले टूनिक भागमभाग में अपनी कलाकृतियाँ बनाते थे, तस्वीर खींचते और इससे पहले कि पुलिस आये, सब लोग भाग खड़े होते थे. सन् दो हज़ार के बाद यह सब बदल गया है। अब वह सोच समझ कर धीरे धीरे नग्न शरीरों को इस तरह से एक बड़े परिक्षेत्र में चित्र की भाँती लगाते हैं जिससे मिलजुल कर विषेश प्रभाव बने। इस शैली में किसी एक व्यक्ति पर दृष्टि या ज़ोर नहीं होता, सब के मिलने से अमूर्त जीवित कला बनती है। कभी कभी वह शरीरों को अलग अलग रँगों से रँग देते हैं, कभी उनको पारदर्शी कपड़ों से ढाँपते हैं, कभी छतरियों, बड़ी गेंद, आदि वस्तुओं के साथ जोड़ते हैं।

स्पैंसर टूनिक की मानव शरीरों से चित्रित कला

उनकी कलाकृति क्षणभँगुर होती है, थोड़े से समय के लिए मानव शरीर उसे बनाते हैं और फ़िर वह कलाकृति बिखर जाती है, लोग चले जाते हैं, वह उस कलाकृति की तस्वीर रह जाती है।

स्पैंसर टूनिक की मानव शरीरों से चित्रित कला

पिछले वर्षों में उनको न्यूयोर्क भी बुलाया गया, कभी किसी रेस्त्राँ, कभी किसी होटल में। एक बार सैंट्रल स्टेशन में भी। पर हर जगह वह किसी व्यक्तिगत जगह पर ही गये, खुले में नहीं गये। इन बीस वर्षों में न्यूयोर्क भी बदल गया है, शायद आज वहाँ की पुलिस उन्हें कुछ न कहे, लेकिन उन्होंने जो निर्णय लिया था, उसे नहीं बदला।

अंत में

टूनिक की कलाकृतियाँ सामाजिक मान्य तथा अमान्य की परिधियों से टकराती हैं, श्लीलता और अश्लीलता की परिभाषाओं को चुनौती देती है, क्योंकि हमारे समाज मानव शरीर की नग्नता को संदेह से देखते हैं। हालाँकि टूनिक अपनी कला में यौन अंगों व यौनिकता को कोई महत्व नहीं देते लेकिन देखने वालों की दृष्टि उनकी कला का मूल्याँकन यौन अंगों के खुलेपन से ही करती है, विषेशकर उन समाजों में, जिन्हें नग्न शरीरों में अपनी संस्कृति की नीवें हिलती दिखती हैं। फेसबुक भी कई बार उनके प्रोफाईल को बन्द कर चुका है, वह कहते हैं कि फेसबुक के लिए उनकी कला नहीं केवल पोर्नोग्राफी है।

अगर आप को मालूम चले कि टूनिक आप के शहर में आ रहे हैं और वह अपनी कलाकृति बनाने के लिए व्यक्ति खोज रहे हैं, तो क्या आप उसमें भाग लेना पंसद करेंगे? बारह-तेरह वर्ष पहले जब उनके बारे में पहला आलेख लिखा था तो सोचता था कि मेरा शरीर बूढ़ा है, बेडोल है, शायद भद्दा लगेगा, अगर जवान होता तो उनकी कलाकृति का हिस्सा बनने अवश्य जाता। पर अब मुझे ऐसा नहीं लगता। मैंने उनकी कलाकृति बनाये जाने वाले वीडियो देखे हैं, उसमें मोटे-पतले, बूढ़े-जवान, सभी हिस्सा लेते हैं, मैं भी हिस्सा लेना चाहूँगा।

स्पैंसर टूनिक की मानव शरीरों से चित्रित कला

अगर आप चाहें तो आप उनके 2018 में नोर्वे में बनाया 360 डिग्री वाला वीडियो देख सकते हैं जिसमें आप देखेंगे कि वह अपनी कलाकृति किस तरह से बनाते हैं। आप चाहें तो उनकी कलाकृति में हिस्सा लेने वाले एक जर्मन युवक के अनुभव के बारे में भी पढ़ सकते हैं।

मुझे नहीं लगता कि कोई उन्हें भारत में निमंत्रण देगा, हमारे यहां तो छोटी छोटी बात पर लोग नाराज़ हो कर दँगा करने की धमकी देते हैं। लेकिन क्या मालूम, कभी ऐसा भी हो सकता है। आप उनकी कलाकृति में भाग लेना चाहते हैं तो उनके वेबपृष्ठ पर अपना नाम लिखवा सकते हैं।

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