इन्डइटामोन ब्लाग का परिचय

इन्डइटामोन ब्लाग

इन्डइटामोन ब्लाग 2017 में बनाया गया था। इसका नाम इन्डइटामोन (Inditamon) तीन शब्दों से बना है, इँडिया यानि भारत, इटली तथा मोन्दो यानि विश्व। मेरी तरह यह भी त्रीभाषी है, और इसकी भाषाएँ हैं हिंदी, अंग्रेज़ी तथा इतालवी। इस ब्लाग को बनाने के लिए वर्डप्रेस, जूमला, जैसी किसी सोफटवेयर का प्रयोग नहीं किया गया, सारी वेबसाईट को एच.टी.एम.एल. (HTML) तथा सी.एस.एस. (CSS) के साथ मैंने अपने आप ही कोड किया है। जानबूझ कर ही इसमें कमैंट या टिप्पड़ियाँ जैसी सुविधाएँ नहीं रखी ताकि स्पैम आदि की दिक्कत नहीं हो। अगर पाठक मुझसे कुछ बात करना चाहते हें तो वह ईमेल (sunil.deepak@gmail.com) या फेसबुक, टिवटर, इनस्टाग्राम आदि के माध्यम से सम्पर्क कर सकते हैं।

मेरा पहला हिन्दी ब्लाग

हिन्दी का मेरा एक पुराना ब्लाग था, जिसका नाम था "जो न कह सके"। करीब बीस वर्ष पहले 2005 के आसपास, जब यह शुरु किया था तब इंटरनेट पर हिन्दी लिखने वाले थोड़े से ही लोग थे, और हम सब लोग एक दूसरे को जानते थे। तब हम एक दूसरे को पढ़ते थे, मिल कर भी हमने कुछ काम किये थे। आज हिन्दी चिट्ठाजगत में कौन क्या लिखता है, कौन प्रसिद्ध है, यह सब कुछ नहीं जानता लेकिन पंद्रह-बीस वर्ष पहले जो ब्लाग लिखते थे, उनके नाम आज भी याद हैं, उनमें से कुछ लोगों से आज भी फेसबुक के माध्यम से कभी कभार बात हो जाती है।

मुझे अपने पहले हिन्दी ब्लाग से बहुत कुछ मिला - थोड़ी सी प्रसिद्धी, लोकप्रियता और बहुत से हिन्दी में लिखने वालों से जानपहचान। यह ब्लाग गूगल के प्लेटफॉर्म ब्लॉगर पर बना था। उस ब्लाग पर मैंने 2017 तक लिखा लेकिन उससे दो वर्ष पहले ही मेरा उससे मन उचट गया था, जब ब्लॉगर वालों में मुझे कहा कि मेरे ब्लाग यौन विषयों पर बातें थी, वह सब अश्लील थीं, मुझे उन्हें हटाना पड़ेगा। मैंने उनकी बात मान तो ली, लेकिन साथ ही लगा कि मैं जो कहना चाहता हूँ उसमें एक सेसंर बोर्ड बीच में आ गया है। इस बात के बारे में सोच कर मैंने ब्लॉगर पर चलने वाले अपने सारे चिट्ठों पर लिखना बन्द कर दिया और यह नया ब्लाग बनाया। कोई मुझे यह नहीं कहे कि मैं अपने ब्लाग पर क्या लिखता हूँ, क्यों लिखता हूँ, कौन सी तस्वीरें लगाता हूँ, यह सब सोच कर मैंने निश्चय किया कि नया ब्लाग सौ प्रतिशत मेरा होगा इसमें किसी व्यवसायिक कम्पनी की किसी तकनीकी का प्रयोग नहीं करूँगा। इसलिए इसे बनाने में मैंने वर्डप्रेस या जुमला जैसे किसी सोफ्टवेयर का प्रयोग नहीं किया।

डॉ. सुनील दीपक अपनी पोती के साथ

मेरा परिचय

मेरा नाम डॉ. सुनील दीपक है और मैं इस ब्लाग का निर्माणकर्ता, लेखक और फोटोग्राफ़र हूँ। मैं इटली के उत्तरपूर्वी भाग में एल्पस पहाड़ों के करीब एक छोटे से पहाड़ी शहर में रहता हूँ जिसका नाम है स्किओ। मैं रिटायर हो चुका हूँ और एक छोटी सी बच्ची का दादा हूँ। आईये सबसे पहले आप को मैं अपने कार्य के बारे में बताता हूँ।

मैं भारतीय मूल का डॉक्टर हूँ। मेरी स्कूल तथा मेडिकल कॉलेज की शिक्षा दिल्ली में हुई। मैं पिछले करीब 40 वर्ष से इटली में रहता हूँ, जहाँ मैं तीन दशकों से अधिक समय तक एक अंतर्राष्ट्रीय संस्था के साथ काम कर रहा था जो अफ्रीका, एशिया व दक्षिण अमरीका के विभिन्न देशों में स्वास्थ्य सम्बँधी कार्यक्रमों से जुड़ी थी। साथ ही मैंने कई बार संयुक्त राष्ट्र संघ की विभिन्न संस्थाओं, विषेशकर, अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान (World Health Organisation) के लिए भी काम किया। इस क्षेत्र में काम करने से मुझे दुनिया भर के बहुत से देशों में घूमने का मौका मिला।

तीस वर्ष पहले जब मैंने काम शुरु किया था तब मेरे कार्य के विषय थे प्राथमिक चिकित्सा (primary health care), सामुदायिक चिकित्सा (community health), तथा कुष्ठ रोग (leprosy)। फ़िर धीरे धीरे, मैं विभिन्न तरह की विलकाँताओं (disabilities) के क्षेत्र में सक्रिय हो गया, विषेशकर सामुदायिक विकलाँग पुनर्निवास कार्यक्रमों (community-based rehabilitation programmes) में। पिछले दस वर्षों में मैंने सामुदायिक स्तर पर शौध कार्य में अनुभव भी जोड़ा और विषेश रूप से एक नयी शौध पद्धति जिसे आत्म सशक्तिकरण शौध (emancipatory research) कहते हैं, में भी बहुत से अनुभव जोड़े हैं।

2014 में, मैं इटली में इस्तीफ़ा दे कर भारत लौटा और इस दौरान एक भारतीय गैरसरकारी संस्थान के साथ जुड़ कर दो वर्ष के लिए असम में गुवाहाटी में रहा। 2017 से मैं वापस इटली में रहता हूँ। सेवानिवृत हो चुका हूँ लेकिन अक्सर संयुक्त राष्ट्र संघ से जुड़े या अगर कोई विकलाँगता या शौध के क्षेत्र में मदद माँगे तो छोटे मोटे काम ले लेता हूँ। कई बार भारतीय संस्थाओं के लिए बिना पैसे के भी काम किया है। हर वर्ष शीत काल में कुछ महीने भारत में बिताता हूँ। अगर आप भारत में कहीं पर सामुदायिक स्तर पर स्वास्थ्य, शिक्षा या विकास के क्षेत्र में काम करते हैं और आप के विचार में मैं उसमें कुछ सहायता कर सकता हूँ तो मुझे अवश्य लिखिये। मुझसे जो बन पड़ेगा, अवश्य करूँगा।

अगर आप चाहें तो मेरे कार्य से सम्बंधित वैज्ञानिक जर्नल तथा किताबों में छपे आलेख व पुस्तकें भी देख सकते हैं। यह अधिकाँश अंग्रेज़ी में हैं।

मेरे रुचि क्षेत्र

मेरा जन्म लखनऊ में हुआ था, लेकिन मैं दिल्ली में ही बड़ा हुआ। मेरे पिता श्री ओमप्रकाश दीपक समाजवादी थे, लेखक व पत्रकार थे और डा. राममनोहर लोहिया की समाजवादी पार्टी की पत्रिका "जन" के सम्पादक थे। मेरा परिवार बहुधर्मी है और मैं किसी भी तरह के कट्टरवाद के विरुद्ध हूँ। मुझे मन्दिर जाने, पूजा पाठ करने आदि में रुचि नहीं, लेकिन उपनिषद और अध्यात्मक पुस्तकें पढ़ने का शौक है।

आरम्भ से ही मुझे पढ़ने लिखने, कला, इतिहास, देश विदेश की यात्राएँ, फोटोग्राफ़ी, आदि विषयों में रुचि थी। 1990 के दशक में जब क्मप्यूटर, इंटरनेट तथा डिजिटल मीडिया का युग आया तो मुझे इन सब विषयों में अपनी रुचियाँ अन्य लोगों के सामने रखने का मौका मिल गया। मैंने इंटरनेट की एच.टी.एम.एल. (HTML) भाषा सीखी और अपनी पहली वेबसाईट बनायी जिसका नाम था "सृजन"। 2001-02 में इस का नाम बदल कर "कल्पना" हो गया और साथ में मैंने हिन्दी, अंग्रेज़ी और इतालवी भाषा में विभिन्न ब्लाग बना कर उनमें लिखना शुरु कर दिया। कल्पना की वेबसाईट अभी भी है, लेकिन उस पर आजकल कम ही लिखता हूँ।

कॉपीराईट

अगर आप मेरे लिखे का उपयोग करना चाहता है, तो शौक से कीजिये। अगर आप उसमें मेरे नाम का और इस चिट्ठे का संदर्भ देंगे और उसके बारे में मुझे बतायेंगे तो मुझे अच्छा लगेगा। लेकिन अगर आप उसे चोरी करके अपने नाम से छापना चाहते हैं, तो शौक से करिये, मैं आप की रिपोर्ट करने नहीं जाऊँगा।

इस ब्लाग की मेरी खींची हुई सब तस्वीरों का भी आप जैसा चाहें वैसा उपयोग कर सकते हैं। मेरे पास बहुत से देशों तथा विषयों की हज़ारों तस्वीरें हैं, अगर आप को कोई तस्वीर ऊँचे रिज़ोल्यूशन में चाहिये तो मुझे ईमेल भेजें। तस्वीरों के आरकाइव कल्पना पर देख सकते हैं। मेरा ईमेल का पता है - sunil.deepak@gmail.com

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